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आगोश .... जीवन कारतूसों का खिलौना बना , समारोहों में गोलियाँ चलती अब दिखावे में ! लाशों के ढेर पर वोटों की उपलब्धियाँ , आज मानवता रोती श्मशान के आगोश में !! विस्फोटों से माँ की आत्मा झुलस रही , क्यूँ यहाँ आतंकी अरमान सुलग गए ? घोर कुत्सित मानसिक प्रवृतियाँ बढ़ रही , रोज लाखों मौत के आगोश में सो गए !! भ्रष्टाचार के बढ़ते स्वाइन फ्लू से , अशोक के भारत की इमानदारी खो गयी ! मुफलिसी रुपी अंधड़ की चपेट में , लाखों बेटिया दहेज के आगोश में सो गयी !! प्रकृति से अनैतिक खिलवाड़ से , मनुष्य पतन की ओर बढ़ रहा ! रिश्तों में बढ़ते वैर वैमनस्य से , अपनी परछाई के आगोश में डर रहा !! लोकतंत्र की हिफाजत भूलकर , हिंसा तंत्र को आज सब अपना रहे ! न्याय अपेक्षा  में बंद का आह्वान कर , महंगाई के आगोश में सभी त्रस्त हो रहे !! ___________________________
आत्म मंथन  दिलों में  बुझ रहे मानवता के दीप  है,   हर  सडक  पर   खून की बरसात है , आगे बढकर  कोई  मदद  क्यूँ करे,  कुशाशन  से मिलता  क्रूर  प्रहार है ! इंसानी  विभिस्ता   में   गमगीनियों  सा माहौल है ! नैतिकता  अधमरी  ,चीत्कारों  से  अंतर्मन  काँपा  है ! दहसत  फ़ैलाने  वालो  से न डर  ,हौसला रख ! मंजिल अब दूर नहीं , साँसों  के आवेग को परख !! जीवन की  तन्हाईयों में खुद की तलाश कर , परायी पीड में अपना जीवन निसार कर , वक्त के थपेड़ों की उथल पुथल , सब्र का मोल समझ जीवन उन्नत कर !! बेसहारों  का तुझे  अडिग  संबल  बनना होगा ! पतझड़  झेलते बुजर्गों  का आत्मबल  बनना होगा !! समाजसेवा  देता आत्मसंतोष  ,मन से हटाता आक्रोश ! आत्म  मंथन    अमृत समान  , जीवन में लाये नया जोश ! ___________________________________...
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मन मन की माया  अपरम्पार  , मोह माया में ढूंढें श्रृंगार , विधुत गति से भी भागे तेज़ , जाने किसके हाथ इसकी डोर ! स्वप्नों की अद्भुत नगरी में , संघर्षों के भयावह  धरातल में , चंचल मृग  सा भागता रहता , खूब भटकता अपनी धुन में ! मचलता कभी कटी पतंग सा , डगमगाता बिन मांझी  के  नाव सा , जीवन भर न थमता क्षण भर , है इसके खेल समुंद्र  सा ! इसको जीतने का जतन भारी , लगी इसी जुगत में दुनिया  सारी  , इसकी ,क्षमता के आगे सब हारे , क्या हो बड़े  बुद्धिजीवी  या हो पुजारी ! मन साधो , न बनाओ इसे मदमस्त हाथी , मन बनाओ  सकरात्मक  न बनने दो इसे उत्पाती , निग्रहित  मन  में होती   शक्ति  प्रचण्ड , ईश्वरीय  भक्ति से  ही  इसे मिलती  शान्ति !
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ॐ जय साईनाथ  ॐ  ॐ  जय  साईंराम  ॐ   ॐ  जय  साईं  नाथ   !  बनाईए सबके बिगड़े काम , हो चाहे सुबह दोपहरी या शाम  , ॐ  जय साईं नाथ  !  बच्चों  से  छिन  रहा   बचपन , गरीबी बढ़ रही अब  निसदिन , आम जनता हो रही  बेहाल , महंगाई  ने  किया सबको  परेशान ! आज  सतयुगी कर्मयोगी  न रहे  द्वापरी धर्मयोगी  भी  अब  न रहे  माँ  के  त्याग को  न करता  कोई  याद   नरभक्षी  अब चारों  ओर बढ़ रहे ! अब  देश  में न  मनाओ  होली  या दिवाली  हर सडक  , मुहल्ले   में चल रही अब  गोली  भय  आतंक  का बाज़ार गर्म है  लूटेरे लूट रहे  जनता बेचारी भोली ! जग में फ़ैल रही  आशक्ति  के घोर अँधेरे  इस विपदा में...
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जीवन जीवन उथान  के मार्ग सदा होते  कंटक भरे , पल  पल  कशमकश  के  बादल सदा  रहते घेरे , सुनियोजित  दिशा  में  बढने से सदा  रोके , बाधाओं  को  पार  करने से कभी  भी न डरे !  मंजिल गर हो पानी  , नकरात्मक  चिन्तन  न लाना  तुम ! जीवन गर  हो कठिन  , संघर्ष  से तनिक न घबराना  तुम ! मन व्यथित करने वालो से  दूर गर  हो जाओगे , विपदा और बढ़ेगी , त्रासदियों के भँवर  में   उलझते जाओगे ! संसारी  रिश्तों  में होते छिपे  स्वार्थ  कोई   न कोई , पग  पग  भावनाओं  के खिलाडी  की पहचान न कोई , जीवन  संबल  बनाने  वाला  ढूँढो  चहू  दिशा , जीवन सुगम  बनाने वाला  परमात्मा  से दूजा न कोई ! त्रिश्नाओ  के  मायावी  जाल से सदा बचना , दूसरो  को  दुखी  देख  कभी न खुश ह...
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आएँ    माँ शारदे को नमन  करें , सुंदर भारत का अब निर्माण करें , ज्ञानगंगा की धाराएं बहे  अब  चहूँ  दिशा  , आयें  सब मिलकर सार्थक प्रयत्न  करें ! दुखो  का अब अंत हो , मन सबका आनन्दित हो ! राग द्वेष  से और  पतन न हो , उम्मीदों  का  ऐसा  उपवन हो ! नयी  आशाओं  का  आह्वान  करें ! माँ  शारदे  का  सभी  आदर करें !! ************************************************************************************** आप सभी स्नेही स्वजनों व् आदरणीय प्रेरको को बसंत पंचमी की सादर  बधाईयाँ !
भोर सुप्त व्यवस्था  पर जागृत चेतना फिर सुप्त  हो चली है  , कुत्सित  आचरण  से  द्रवित पुकार फिर  सुप्त हो  चली  है , वक्त  के  नस्तर  बदस्तूर  जारी  रहेंगे जाने  कब  तक , झींगुर  की  झी  में  स्याह रात  फिर गुमनाम हो चली हैं ! दुखो का सैलाब है ,निर्ममता का प्रहार है ! मौत  का  मंजर है , इंसानियत  का आया अंत है ! नफरत  के समंदर  में  अन्याय  की  बढ़ोतरी  हो चली  है , भोर  मनुजता  की  क्यूँ  अब  दूर हो चली है ? *********************************************************
 काव्य समाचार ******************** 1   अनाचारियों को सबक सिखाने और गरीब पीड़िताओं के लिए दर्द नहीं हैलीकॉप्टर में बैठकर प्रदेश का दर्द को समझने वाले बेदर्दों की कमी नहीं ! _________________________________________ 2  नाम प्रसिद्धी की राजनीती खेल रहा आज हर आदमी जिनकी जिन्दगी लुटी भूल गए सभी दूसरों की पीड़ा में आज रोटियाँ सिकती ____________________________ 3  सिंह की दहाड़ से कांपता समस्त वनप्रदेश बेबाक लेखनियों पर चल रही सत्ता की तेज़ धार गमों के कुम्भ में नहा रहे समस्त देशवासी गफ़लत में जीने वालो देखो जन जन की पैनी धार _______________________ 4   सुप्त व्यवस्था पर जागृत चेतना फिर सुप्त हो चली है कुत्सित आचरण से द्रवित पुकार फिर सुप्त हो चली है वक्त के नस्तर बदस्तूर जारी रहेंगे जाने कब तक झींगुर की झी में स्याह रात फिर गुमनाम हो चली हैं .  __________ 5 जीवन पहेली ....सच्ची सहेली , साथ खेली .....साथ ले जायेगी ! -------------------------- 6 समाज को महिला दिवस की दरकार नहीं  एक दिवस से उसको कोई सरोकार नहीं...
पत्थरों के शहर में  सिसकती जिन्दगी तू मायूस रहेगी , पत्थरों के भयावह शहर में इन्साफ की पुकार न सुनेगा कोई नाम की चाह रखने वालों की भीड़ में अस्मत लुटी तेरी हर गली खबरों में चमके कई गुमनाम चेहरे तेरा दुःख बना राजनीतिक सुख हर कहीं अपना नाम गिनवाने हेतु भीड़ जुटाते गर्म खबरे बनी तेरी सिसकने की कहानी देख नाम कमाया आज अनेकों पत्थरों ने तेरी पीड़ा तेरे गम के व्यापारी सभी खबरों में चमक गए देख आज नाम हजारों इन्साफ की पुकार में खोयी तेरी कहानी पत्थरों से मैदान भरा पत्थरों के शहर में दिल से बैचैन रूहे चीखती रही पत्थरों से अपना सर फोड़ते दिखाई दिए संस्थाओं के नाम में पहचान तेरी गुम हुयी सुबह लोग खुश हुए पत्थरों के शहर में तेरे लिए सम्मान क्या चंद आंसू भी नहीं नाहक ढूंढ रही इंसानियत पत्थरों में अत्याचारों के बढ़ रही लहर हर कहीं अस्तित्व तेरा मिट रहा पत्थरों के शहर में *****************************************
रिश्ते और रेत  रेत और रिश्ते  दोनों आधार  दोनों प्रहार  आधार बने  जीवन संचार  सुगंधित पुष्प  प्रहार बने  रिसते घाव  घाव रुलाते  संजीवनी भी जहरीली भी हरियाली भी मरुस्थली भी रिश्ते सत्य रेत कट्टू सत्य
दोस्ती दोस्ती बनाने वालों की भीड़ अनन्त  दोस्ती निबाहने वालों की खोज कठिन  दोस्ती बिगाड़ने वालों की भीड़ अनन्त  दोस्ती निबाहने वाले किरदार कम  दोस्ती के नाम पर उपहासी अनन्त  दोस्ती निबाहने वाले अब हो गए खत्म  दोस्ती के नाम पर आडम्बरी अनन्त  दोस्ती के रोशन नाम हो गए कहीं गुम  दोस्ती के नाम पर बढ़ रहे फरेबी अनन्त  दोस्ती की चाह में राह भटक न जाना कभी तुम !
मंजिल पाने के लिए बढ़ते सभी  नकरात्मक सोच से उलझते कई  फौलादी हौसलों से मिलती राहे नयी  सकरात्मक चितन से मिटते भ्रम कई  ****************सुनीता **************** हितोपदेश में निहित व्यक्ति का मन:स्तिथि  कर्मशील होने से मिलती जीवन में प्रगति  परनिंदा व् अभिमान देती आत्मा को अवनति  क्षमाशील , स्नेहशील व् सहानुभूति देती हमे उन्नति  **********************सुनीता ************************* दिल को लोग दौलत का घर बनाते अकसर  दिल को लोग रिश्तों का साम्राज्य बनाते अकसर  दिल को लोग भावनाओ का समन्दर बनाते अक्सर  हम दिल को भावमयी  रिश्तों  की दौलत से सजाते अकसर !! *************************सुनीत ा ********************* फरवरी लाई युवाओं के कई रंगीले डे , अपनी सभ्यता भूल मनाते विदेशी डे , रौंद डाली अपनी भारतीय संस्कृति ! _______________________________________________________ कल हम सभी देश वासी गणतंत्र की पावन बेला पर एकत्र होकर देश की गौरव गाथा को याद करते हुए एक परम्परा मात्र सी फिर निबाहेंगे किन्तु हम सभी क्या व...
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शिक्षण क्षेत्र व् लेखन क्षेत्र के मध्य अन्तर्द्वन्द को भावों में उतारने का पर्यास ! जीवन अजीब उदासीन यादों की अनचाही अग्नि जिसके धुंए की घुटन ताउम्र पीछा करती रुलाती करहाती पर चिता का इन्तजार करती एक अहसास सी .... नयी चेतना की अलख कोहरे सी अंतहीन निशब्द अनन्त की तलाश भटकती रूह अंतहीन बेपरवाह सपनो की उड़ान ......!!  
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__________ चूहा तेरे मेरे बीच की हो सैकड़ो दूरी हरदम लडकर  मिटाते  दूरी  प्यारे नटखट बिल्ले  तेरी क्या है मजबूरी  होली पर कर लूँगा मैं  भी मुरादे  पूरी  जंगल  के रिश्तों में  तुम हो  बड़े  पर  हो फिर भी बहुत नखचढ़े  छोटे  के शिकार छीनकर  रहते क्यों अकड़े  तेरे हाथ में बन्दूक तो  मेरे हाथ भी नहीं जकड़े  मैं  तो  नन्हा  फूल  तुम हो  वृक्ष  छायादार  मेरी ठिठोली  पर क्रोधित  होकर न बनो खूंखार  खून तुमारा और मेरा  बहेगा तो मचेगा  हाहाकार  बस्ती  उजड़ेगी ,उपद्रव  बढेगे  और मिलेगी केवल धिक्कार  बिल्ला  अरे चूहे है तो छोटा   पर है  तू बड़ा खोटा  देख मुझे  बदलता तू अपनी बात  ओ बिन पैंदे  का लोटा  मेरा भोजन  चुरा चुराकर  बन रहा तू  मोटा  भाग यहाँ से  दूं नहीं तो  तुझे मै...
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********************-माँ गंगा***************************  वही  पहचान सकता है ,माँ गंगा की निर्मलता जिसे परखना आता है , उसके मन की कोमलता  यदि महसूस करना है ,उसकी पवित्रता की भावना , पूछो पावन करती जो ,तुम्हारे ह्रदय की कोमलता , हरेक पाप धोती है ,मिटाती सबके जीवन के संताप , उपेक्षित जीवन जीती है ,फिर भी बढाती  जल की  कोमलता , हर पल रोती  है ,देख अपने स्नेह बलिदान की कीमत , जिसे पूजनीय  रहना था ,गंदगी देख  मिट रही उसकी कोमलता , हमको सिखाती   है जो जीवन चक्र की निरन्तरता , उसे निश्चल समझकर विषाक्त  कर रहे हम उसकी धाराओं की कोमलता !
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TADKESHWAR     MAHADEV   TEMPLE TADKESHWAR  temple is dedicated to LORD SHIVA ,is situated in a cup shaped valley surrounded by Deodar trees .Located at the height of 1800m is a place of salvation.It is about 12 kms distant from lansdowne . It is about 600 years old sacred shrine refered as Shiva shidh peeth .It is surrounded with beautiful forest of blue pine deodar and oak .One of the ancient Shiva temple is perfect place for trekking ,bird watching and ideal location for nature lover ..Though the road to temple is barely fit for driving . The road is quite narrow and breathtaking and having landslides being constantly repaired still have to be very mentally alert to avert mishappenings. The road to Tadkeshwar is more or less deserted as there is no habitation along the way and neither can we find tea shops . The environment is serene ,quite filled with vibrant energy. around one km walk to the shrine has narrow paved path . Before we arrive at the shri...
जीवन के सुंदर उपवन में , संगी साथी गाते मस्त बहारों में,  सुख दुःख को बखूबी निभाते वे , धोखे की फितरत न रखे वे , उम्र के हर पडाव में रहते साथ हैं , सच्ची मित्रता सबको लुभाती है , आओ सभी इस टोली में शामिल हो , दुनिया से यदि वैर वैमनस्य मिटाना हो ! *********************************** प्रगति की दिशा में अनुशाषित बढ़ रहे सभी , सुसंस्कृत व् एकता के भाव को अपनाये सभी , पर ठहरो इस भीड़ में छिपा है अन्धकार कहीं , पैनी नजरो से खोजो इस भारत के दुश्मन को अभी , . बच्चों का बचपन छीनकर करें न ये मनमानी कभी , देश की सुरक्षा न हो जाये खंडित कहीं , वतन रहे सुरक्षित अगर हम जाग जायें अभी , जागो , भीड़ में भीड़ बनकर न रह जायें सभी , सजग होकर भीड़ में खड़े दुश्मन को पहचाने अभी ! ********************************************   दोस्त मिले हो बर्षों बाद ,  अबके निभाना हरदम साथ ! मैं तो क्लर्क छोटा सा , तुम बन गए हो मेरे साहब ! मैं तो सुदामा इस युग का , तुम बन कर दिखाओ द्वापरी कृष्ण ! कलयुगी कालिख दोस्ती पर , तुम खिलाओ श्वेत स्नेह कमल ! दुनिया मैं फिर कायम होगा , हाथ से यु म...
*****************त्रासदी एक माँ की ************************ जिन तीन लालों को अपने दूध व् लहू से सींचा मैंने  अपनी त्रासदी भुलाकर  हरदम उन्हें  हंसाया मैंने  अपनी सूनी गोद देखकर  सोच रही क्या पाया मैंने  वतन की रक्षा  की राह दिखाकर  खुद को रुलाया मैंने  एक लाल  को मिटा दिया  देश की आन की खातिर मैंने  दूसरे  को  खुद मार दिया  देश की बेटियों की लाज हेतु मैंने  तीसरे ने वृद्धा  आश्रम  दिखा दिया , जिसको सबसे अधिक चाहा  मैंने  हे धरती माँ  , मेरी  कहानी तो छोटी पर तेरे लिए  जहाँ  लुटा दी मैंने !
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1 न समाज बदलेगा ,न लोग बदलेंगे  न सोच बदलेगी , न दिशा बदलेगी  न अपराध रुकेंगे , न दहशत रुकेगी  न कुरीतियाँ बदलेगी , न नीतियाँ बदलेगी  न तन्त्र बदलेगा , न आक्रोश का असर दिखेगा  न जाने कब लोग जागेंगे , न जाने कब सुबह होगी !! !! ***************सुनीता *************   2  उठो जागो यु चुप न बैठो , देश व् दिशा तुम बदलोगे  गर जीना हो सकूं से तो आत्म मंथन तुम्हे करोगे , नशा ,हत्याएं ,अपहरण व् अनैतिकता को तुम्ही बदलोगे , सूर्य विजय का दिखेगा जब कदम से कदम तुम मिलाओगे , कलके भरोसे न बैठो तुम ,जीत का ध्वजा तब फैराओगे , जीवन तब सबका उन्नत होगा जब सबकी पीड़ा तुम समझोगे !! *****************सुनीता ******************
चिन्तन  समाज  का दर्पण हैं नर  नारी , चलती है जिससे दुनिया सारी  , विश्वास  के पहिये पर चलती गाड़ी  अनैतिक मूल्यों पर पड़  रही अब भारी , हाथों में लिए हाथ बढाओ स्नेह डोरी , सृजक का अपमान न कर बनके व्यापारी , जीवन चक्र को कुचलने की न शक्ति तुम्हारी , विपदा में नारी भोग्या  बन रह गयी बेचारी , अनैतिक नरों  का चिन्तन बढ़ा  रही है लाचारी , संस्कृति  का मान बढायें  ,बुझे न अब दामिनी की चिंगारी . भविष्य की नीव रखे अभी,  बनेगा तब जीवन गुणकारी !
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गरीबी की कहानी  सर्दियों में  अर्ध वसन  देह  का संतोष सहारा चीथरों  के भीतर होता ठण्ड का बसेरा  सुबह और रात शीत की पीड़ा बनती लुटेरा  बिजली के खबों  तले ढूंढे गर्मी का सहारा  भोजन का न उसका कोई ठिकाना  जूठन व् बासी अन्न में वह ढूंढें सहारा  पेट की आग को अक्सर पानी से बुझाता  हर पल एक दूजे  को देख देते दिलासा  सर्दियों की  ठंड  में एक मैली चादर में सिमटे बच्चे  दिन भर  के काम के बाद नींद कहाँ ,सपने बुनते बच्चे  किटकिटाते  दांत , कंपकंपाती  देह सहते बच्चे  ठण्ड की बयार को मजबूरन सहते लाचार बच्चे  नित्य सवेरे पानी भरने कतार लगाते  उसी वसन   में नहाते  और काम पर जाते  सारा दिन फिर उसी में गुजार देते  फिर  भी  चेहरे पर असहाय मुस्कान भरते  बड़ी  ऊँची  इमारत  देख  हतप्रभ रहते  टपकती ...
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उत्पीडित नारी   जीवन के हर  घटते   पलों  को हरदम मैंने आंसुओं से सीचा , दुखों के सैलाब में  कभी भूल से भी न दिखाया किसीको नीचा , हे तारणहार  तेरी इस दुनिया  में नारी  को ही उत्पीडन सहना पड़ता , मेरी सिसकियाँ  और करुण  पुकार ,किसी का हृदय  न द्रवित करता ,  क्रूरता से   तमाशबीन बने  लोगों की सोयी आत्मा  सोते से नहीं कोई  जगाता , दूसरों  के दुःख में  लोग  कैसे  बना लेते उनपर  ढेरो कहानिया  या किस्सा , है  विनती  बस  इतनी  इन  संवेदनहीन लोगों के  हिस्से में न भरना तू  क्षमादान !  18/12/12 सदियों से नारी का घर, बाज़ार ,दफ्तर  ,रेलों  और अब बस में भी कोई सुरक्षा नहीं ...तो  फिर  नारी का अस्तितिव क्या है ....आपके विचार सादर अपेक्षित !
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SIDHH  PEETH MEDANPURI DEVI TEMPLE Uttarakhand is great place of trekking and pilgrimage .It is also called "DEVBHOOMI ".The hilly belt offers to captivate tourist with its mystic charm enveloped by spiritual air . Uttarakhand is blessed with deep cut breathtaking valleys , beautiful meadows , waterfalls in terms of its spirituality ..The land of holiest shrines , temples and majestic views  , is drastically affected by migration, and now only popular among the natives . I always have inclination towards our temples and the legend associated to them . Fascinated and inspired by remarkable story of our brood goddess Medanpuri   Devi , for first time I visited the shrine which is really an excellent place of visit in terms of meditation and soothing environment .Situated at an elevation of 1657m, the temple is popularly known as Medanpuri devi temple , that stands erected in Dharkot village ,Patti - Udaipur , Yamkeshwar block , Pauri  Garhwal..The Goddess bas...