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Showing posts from June, 2015
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यातायात जाम _____________ दुनिया के जामनगर में चारो तरफ भीड़ ही भीड़ सड़क और सड़कों को जोड़ती सड़कें चलती अंतहीन सफर पर जहाँ आदमी की मात्र पहचान बस ...वाहन रेंगती - हॉर्न बजाती असंख्य छोटे- बड़े वाहन अपनी बनावट पर इतराते फिर अपनी अमीरी पर ऐंठते -धकेलते ठेंगा दिखाते जीवन पथ पर बढ़ते ये मुसाफिर मशीनी युग के अजीब दीवाने जहां हर शक्स कैद होकर इसकी तृष्णा संसार में इतना उलझ चुका है हर घर के हर व्यक्ति चाहने लगा एक वाहन समाज पर प्रभाव दिखाने भीड़ बढ़ाने जाम लगाने क्योंकि वाहन मोह को भोग रहा है ढ़ो रहा है गाली- गलौच के बोझ को असमय मृत्यु के खौफ को जिसको देख रहा निसदिन जाम को पचाने की आदत ने सिखा दिया आदमी को पचाना समय की सभी अनियमित को जिसमें हर रोज एक नया जीवन को मजबूरी में जीते हैं नासमझ लोग । ___________सुनीता शर्मा
घड़ी भर की वह बरखा फुहार बनकर आया बेहरूपिया था मगर ऐतबार बनकर आया वक़्त की बंदिशों मेँ पहचान ना सके जिसे वो गुलशन मेँ मेरे खार बनकर आया रिसते जख्मों की तदबीर तो जरा देखिए वह तो रिश्तों का सौदागर बनकर आया परवाज़ की बुलंदियों पर फक्र था मुझे पर कतरने बहेलिया माहिर बनकर आया रूह भटकती रही घने दश्त मेँ रात दिन नागहा मेरा रकीब खंजर बनकर आया