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मैं और तुम ( नर और नारी ) नारी तुम मेरे जीवन संगिनी नही प्राण उर्जा हो , तुम्हारे हर अक्ष का मैं सदा ऋणी रहा और रहूँगा, सीता, सावित्री,अहिल्या ,कुंती ,द्रोपदी,गांधारी , सब रूपों को पाने का मैंने साहस दुस्साहस किया, तुमने दया की सम्बल बन सदा मेरा सत्कार किया, तुम सब रूपों में बनी भारतीय संस्कृति की परिचायक , मेरे मरने पर तुम कभी रणचंडी ,कभी सती कहलाई , मेरे हर जुल्म को तूने सहर्ष स्वीकार किया , मद मैं चूर मैंने तेरा कभी सम्मान कभी अपमान किया , मैंने तेरे तीन रूपों को सदा पूजा और पूजता रहूँगा , पर आज मै और मेरा अस्तित्व तेरी नजरों में क्यूँ गिर गया ? अपने अस्तित्व की लडाई में तूने मेरा तिरस्कार किया , बसनो को कम करना, मर्यादा की सीमा लाँघना क्यूँ तूने सीख लिया ? हम हैं महान अपनी सारी संस्कृति गौरवशाली है ,क्यूँ तूने इसे खंडित किया ? पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर तूने माँ दुर्गा का अपमान किया , आज गाली स्वरूप लगती नारी जबसे तूने मदिरा पान किया , नग्नता की सीमा लांघकर तूने क्या गौरव शोहरत हासिल किया , तेरी इस भूल देख आज बन गयी अभिश...
यातायात जाम _____________ दुनिया के जामनगर में चारो तरफ भीड़ ही भीड़ सड़क और सड़कों को जोड़ती सड़कें चलती अंतहीन सफर पर जहाँ आदमी की मात्र पहचान बस ...वाहन रेंगती - हॉर्न बजाती असंख्य छोटे- बड़े वाहन अपनी बनावट पर इतराते फिर अपनी अमीरी पर ऐंठते -धकेलते ठेंगा दिखाते जीवन पथ पर बढ़ते ये मुसाफिर मशीनी युग के अजीब दीवाने जहां हर शक्स कैद होकर इसकी तृष्णा संसार में इतना उलझ चुका है हर घर के हर व्यक्ति चाहने लगा एक वाहन समाज पर प्रभाव दिखाने भीड़ बढ़ाने जाम लगाने क्योंकि वाहन मोह को भोग रहा है ढ़ो रहा है गाली- गलौच के बोझ को असमय मृत्यु के खौफ को जिसको देख रहा निसदिन जाम को पचाने की आदत ने सिखा दिया आदमी को पचाना समय की सभी अनियमित को जिसमें हर रोज एक नया जीवन को मजबूरी में जीते हैं नासमझ लोग । ___________सुनीता शर्मा
