भाई की यादें 


तुझसे बिछड़कर फिर वही रात दिन ,
छिन गया वो था दिले सकूँ ,
हर बढ़ते तूफ़ान की न कोई मंजिल ,
जिसका घर था केवल हमारा दिल ,
वक्त के हाथों कितने मजबूर ,
आईने में ढूंढे तेरी तस्वीर ,
चुभती हर पल वह श्याह सवेरा ,
आंसुओं से  भीग गया  बिना तेरे किये दीदार ,
जीवन की हरेक  खुशियों में गमगीन शहर ,
अंखियों के सपनो में केवल तेरा बसेरा ,
क्यों मेरी चाहत बना खुदा की चाहत ,
मुझे रुलाकर मिली उसे जो राहत ,
मेरी तकदीर व् मेरे अपनों के आंसू की दर्दमई   हालत ,
कोई रूह को न दे सकूँ ,देता बस जैसे खैरात ,
जितने भी मिले ,दिए सभी ने गमे बरसात ,
जीवन के आखिरी पड़ाव में भी तेरा गम सताता ,
दुनियावी भीड़ में भी कोई एक पल न देता राहत ,
बुझे अरमान ,सिसकता दिल ,भावनाओं को कोई न आंकता ,
उफ़  यह जिन्दगी की तन्हाईयों में जीना कोई समझ नही सकता ,
खता  खुदा की समझें या अपनी तकदीर की घुटी जज्बात ,
दुनियावी रिश्तों से न कोई सरोकार जब रूह न दे साथ ,
कितने ही वसंत दिखे पर तुझ बिन सब पतझड़ सा लगता ,
एक कसक सी रह गयी जीवन में भाई न तेरी इसमें कोई खता,
आँखों के ख्वाब और दुनिया के धोखे  में रास न आता कोई वसंत !!     2/10/2011
दिवंगत भाई की तिथि * 8 /12/1992*  पर भावमयी श्रधांजलि 

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