मेरी परछाई 

कभी आईने  का धूल सा  ,
कभी जीवन का फूल सा  ,
कभी खिलखलाता सा ,
कभी मुरझाया सा ,
कभी मस्त पंछियों सा ,
कभी सुस्त घोंगा सा ,
कभी प्यारा दुलारा सा ,
कभी लगता अंगारा सा ,
कभी बूढा बरगद  सा ,
कभी नन्हा पौधा सा ,
कभी बहती सरिता सा ,
कभी गंभीर समुन्द्र सा ,
मेरी परछाई मेरी  प्रेरणा सा !१०/१०/२०१२ 

Popular posts from this blog